Friday, March 12, 2010

मैं तुमसे प्यार करूं कैसे

"तुम तेज़ भागती हिरनी हो मैं छोटा नन्हा कछुआ हूँ, मैं तुमसे प्यार करूं कैसे मैं तुमसे प्यार करूं कैसे"

"तुम वन की हो इक मोरनी मैं हूँ उस वन का इक बगुला, मैं तुमसे प्यार करूं कैसे मैं तुमसे प्यार करूं कैसे"

"तुम हो सागर की लहर मैं ताल का गन्दा पानी हूँ, मैं तुमसे प्यार करूं कैसे मैं तुमसे प्यार करूं कैसे"

"तुम छलक-छलकती हो गगरी मैं बिन पेंदी का लोटा हूँ, मैं तुमसे प्यार करूं कैसे मैं तुमसे प्यार करूं कैसे"

"तुम पर्वत की ऊंची चोटी मैं धरती का इक कीड़ा हूँ, मैं तुमसे प्यार करूं कैसे मैं तुमसे प्यार करूं कैसे"

"तुम प्रातः की उषा नागरी मैं रात का जाता तारा हूँ, मैं तुमसे प्यार करूं कैसे मैं तुमसे प्यार करूं कैसे"

"तुम आसमान का ध्रुव-तारा मैं धरती का इक बौना हूँ, मैं तुमसे प्यार करूं कैसे मैं तुमसे प्यार करूं कैसे"

"तुम स्वर्ग की हो इक अप्सरा मैं धरती का इक मानव हूँ, मैं तुमसे प्यार करूं कैसे मैं तुमसे प्यार करूं कैसे

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5 comments:

  1. Tum madhur hi ho na,
    kya ho gya yaara, ye kya kya likhne lga :-)

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  2. :-) ha ha ye mai hi hun...
    its hard to believe but i was in class 9th wen i wrote ds poem.. :-)

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  3. hey...i din't kno u wrote poems.. it's nice:D

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  4. yar mana ki tu usse pyar nahi kar sakta par common yar tu khud usko itni unchai pe rakhega to us tak pahuchega kaise pyar karne ke liye, mujhe lagta hai tujhe apni height badhani hogi...

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